Remarks by H.E. Shri Amararam Gujar in the World Hindi Day Programme at DMI - Baptist University, 9 January 2026
आदरणीय उप कुलपति महोदय, विश्वविद्यालय के सम्मानित न्यासी एवं प्राध्यापकगण, विशिष्ट अतिथिगण, देवियों एवं सज्जनों, और मेरे प्रिय विद्यार्थियों !
विश्व हिंदी दिवस के इस अवसर पर, मलावी की राजधानी लिलॉन्गवे स्थित प्रतिष्ठित D.M.I–Baptist University के इस गरिमामय परिसर में आप सभी के बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यंत हर्ष की अनुभूति हो रही है।
यह अवसर केवल एक भाषा के उत्सव का नहीं है, बल्कि यह मानवीय संवेदनाओं, सांस्कृतिक संवाद और उस वैश्विक सहयोग की परंपरा का उत्सव है, जिसे हिंदी भाषा सदियों से सशक्त बनाती आई है। एक राजनयिक के रूप में, मैं हिंदी को भारत की 'सॉफ्ट पावर' के एक शक्तिशाली माध्यम के रूप में देखता हूँ।
विश्व हिन्दी दिवस का मूल उद्देश्य विश्व में हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिये जागरूकता पैदा करना हिन्दी को अन्तरराष्ट्रीय भाषा के रूप में प्रस्तुत करना और हिन्दी के लिए एक अनुकूल वातावरण निर्मित करना जिससे हिन्दी के प्रति लोगो में रूचि उत्पन्न हो ताकि हिन्दी को वैश्विक भाषा के रूप में दर्जा हासिल हो
अंग्रेजी और मंदारिन के बाद हिंदी दुनिया की व्यापक रूप से बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। भाषाई विविधता के रूप में अंग्रेजी, मंदारिन और स्पेनिश के बाद हिंदी दुनिया में चौथी सबसे अधिक बोली जाने वाली एवं समझी जाने वाली भाषा है। हिंदी का उद्भव वैदिक संस्कृत एवं प्राकृत भाषा से हुआ है
हिंदी न केवल भारत की राजभाषा बल्कि आम बोल चाल के संचार का माध्यम भी है, बल्कि यह एक सांस्कृतिक धरोहर है। इसमें भारत की आत्मा बसती है
प्रतिवर्ष 10 जनवरी को मनाया जाने वाला यह दिवस हमें स्मरण कराता है कि 1975 में नागपुर से शुरू हुई यह यात्रा आज एक वैश्विक आंदोलन बन चुकी है। आज हिंदी फिजी से लेकर मॉरीशस तक और लिलॉन्गवे से लेकर लॉस एंजिल्स तक फैली एक वैश्विक चेतना है। यह एशिया, अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका सहित विश्व के अनेक देशों में बोली और पढ़ी जा रही है। आज संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी हिंदी की गूंज सुनाई देना हमारे लिए गर्व का विषय है।
यदि हम भारत एवं मलावी के द्विपक्षीय सम्बन्धो की बात करे तो इस बात का उल्लेख करना अनिवार्य है कि भारत का मलावी के साथ मैत्रीपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण सम्बन्ध एक शताब्दी से भी पुराना है
मलावी जैसे मैत्रीपूर्ण देश में हिंदी के प्रति इस उत्साह को देखना प्रेरणादायक है। यह इस बात का प्रमाण है कि भाषा भौगोलिक सीमाओं से परे जाकर दिलों को जोड़ने की क्षमता रखती है। भारत और मलावी के संबंध साझा इतिहास और आपसी सम्मान पर आधारित हैं।
DMI–Baptist University जैसे संस्थान इस साझेदारी को एक नया आयाम दे रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में हमारा सहयोग—चाहे वह ITEC छात्रवृत्ति हो या डिजिटल इंडिया पहल—इस बात का प्रमाण है कि भारत अपनी प्रगति को अपने मित्रों के साथ साझा करने में विश्वास रखता है। आप सभी युवा भारत और मलावी के बीच एक 'सांस्कृतिक सेतु' (Cultural Bridge) का कार्य कर रहे है
प्रिय विद्यार्थियों, किसी भी नई भाषा को सीखना केवल व्याकरण को समझना नहीं, बल्कि एक नई संस्कृति और दृष्टिकोण को भी अपनाना है। हिंदी सीखकर आप न केवल भारत की महान साहित्यिक परंपरा से जुड़ते हैं, बल्कि आधुनिक भारत की तकनीकी और आर्थिक प्रगति के साझीदार भी बनते हैं।
भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और शीघ्र ही तीसरी बनने की ओर अग्रसर है। हिंदी का ज्ञान आपके लिए भारत के सूचना प्रौद्योगिकी (IT), अंतरिक्ष अनुसंधान, चिकित्सा और सिनेमा जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाओं के द्वार खोलता है। जब मलावी का कोई छात्र हिंदी में संवाद करता है, तो वह भारत के 1.4 अरब लोगों के साथ एक सीधा भावनात्मक संबंध स्थापित करता है।
आज के डिजिटल युग में हिंदी की पहुँच और भी बढ़ी है। सोशल मीडिया, फिल्मों, साहित्य, समाचार माध्यमों और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में हिंदी की उपस्थिति अब पहले से कहीं अधिक प्रभावशाली है। भारत सरकार ने हिंदी के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं — जैसे विश्व हिंदी सम्मेलन, हिंदी विश्वकोश, और विदेशों में भारतीय सांस्कृतिक केंद्रों द्वारा हिंदी कक्षाओं का नियमित रूप से आयोजन कारना इत्यादि शामिल है यहां लिलॉन्गवे स्थित भारतीय उच्चायोग भी इसी परंपरा को आगे बढ़ा रहा है।
मुझे यह बताते हुए गर्व है कि मलावी में न केवल भारतीय मूल के लोग, बल्कि स्थानीय नागरिक भी बड़ी रुचि से हिंदी सीख रहे हैं एवं हिंदी फिल्मो के गाने सुनते है। मै इस बात पर बल देना चाहता हू कि हिंदी भाषा केवल एक अकादमिक विषय तक ही सीमित नहीं , बल्कि एक सांस्कृतिक बंधन के रूप में — भारत और मलावी के बीच प्रभावशाली मैत्री के पुल के रूप में रूप में अपनी भूमिका निभा रही है
मै आप सभी से अनुरोध करता हूँ कि आप हिंदी में बोलने, पढ़ने और लिखने का अभ्यास निरंतर जारी रखें। हिंदी की कहानियाँ पढ़ें, भारतीय गीत सुनें, हिंदी की कविताओं और साहित्य का अध्ययन करे ।
भारत और मलावी दोनों देशों के बीच शिक्षा, प्रौद्योगिकी, और संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। हम चाहते हैं कि हिंदी इस सहयोग का प्रमुख माध्यम बने। आने वाले समय में, मैं उम्मीद करता हूँ कि आप सभी लोगो के प्रयास से हम हिंदी को मलावी में और मजबूती प्रदान करेगे ।
अंत में, मैं यही कहना चाहूँगा कि भाषाएँ दिलों को जोड़ने का काम करती हैं। और जब हम एक-दूसरे की भाषा सीखते हैं, तो हम विश्वास, सम्मान और मित्रता की भी नींव रखते हैं।
मैं DMI–Baptist University के प्रबंधन और आयोजकों को इस आयोजन के लिए हार्दिक बधाई एवं धन्यवाद देता हूँ। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आज का यह कार्यक्रम हमारे दोनों देशों के बीच शैक्षिक और सांस्कृतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई प्रदान करेगा।
मै यहाँ पर प्रसिद्ध हिंदी कवि और साहित्यकार भारतेन्दु हरिश्चन्द्र जी की कुछ पंक्तियों उल्लेख करना चाहूँगा जिसमे उन्होंने मातृभाषा एवं हिंदी की महत्ता को समझाया है
निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल
बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।।
निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल' अर्थात मातृभाषा ही सभी प्रकार की उन्नति का मुख्य आधार है। निज भाषा की उन्नति के बिना संपूर्ण विकास संभव नहीं है। बच्चे के जन्म के बाद उसका घर ही उसकी पहली पाठशाला होती है भारतेंदु जी का यह कथन एकदम सही है कि अपनीभाषा की उन्नति के बिना हर प्रकार की उन्नति महन्वहीन हैं । इसी के साथ मै आप सभी को पुनः विश्व हिंदी दिवस की शुभकामनाएं।
मैं कामना करता हूं कि हिंदी मलावी में निरंतर रूप से फलती-फूलती रहे।
जय हिंद! जय भारत !